हिंदी भाषा भारत का राजभाषा भाषा है। यह भाषा मुख्य रूप से उत्तर भारत में बोली जाती है। केंद्रीय स्तर पर भारत में सह-आधिकारिक भाषा हिंदी है। यह हिंदुस्तानी भाषा के शब्द समान हैं। हिन्दी संविधान से भारत की राजभाषा और भारत की सबसे अधिक बात करने वाली भाषा बोलने वाली भाषा है। हिन्दी भारत की संविधान में राष्ट्र की भाषा को परिभाषित किया गया है।


हम   कितनी   भी   ऊंचाई   पर   पहुंच   जाएं   परंतु   हमें   अपनी   मुख्यधारा   से   जुड़ा   रहना   जरूरी   होता   है।   इसी   तरह   किसी   भी   राष्ट्र   की   उन्नति   के   लिए   वहां   की   भाषाओं   से   ओतप्रोत   होना   भी   जरूरी   होता   है।   राष्ट्रभाषा   हिंदी   इसी   संदर्भ   में   हमें   एक   नए   पद   की   ओर   अग्रसर   कर   रही   है।   चाहे   वह   आजादी   से   पहले   का   समय   हो   या   आजादी   के   बाद   का   समय।   इसीलिए   हमें   हिंदी   भाषा   का   ज्ञान   होना   बहुत   आवश्यक   है।   किसी   कार्य   में   सफलता   प्राप्त   करने   के   लिए   परिश्रम   तथा   संघर्ष   करना   पड़ता   है।   हमारी   हिंदी   भाषा   भी   कड़े   संघर्ष   के   बाद     वर्तमान   स्थिति   तक   पहुंची   है।


'हिन्दी' शब्द की व्युत्पत्ति भारत के उत्तर-पश्चिम में प्रवहमान सिंधु नदी से संबंधित है। विदित है कि अधिकांश विदेशी यात्री और आक्रान्ता उत्तर-पश्चिम सिंहद्वार से ही भारत आए। भारत में आनेवाले इन विदेशियों ने जिस देश के दर्शन किए वह 'सिंधु' का देश था। ईरान (फारस) के साथ भारत के बहुत प्राचीन काल से ही संबंध थे और ईरानी 'सिंधु' को 'हिन्दू' कहते थे [सिंधु-हिन्दु, स का ह में तथा ध का द में परिवर्तन-पहलवी भाषा प्रवृति के अनुसार ध्वनि परिवर्तन। 'हिन्दु' से 'हिन्द' बना और फिर 'हिन्द' में फारसी भाषा के संबंध कारक प्रत्यय 'ई' लगने से 'हिन्दी' बन गया। 'हिन्दी' का अर्थ है-'हिन्द का'। इस प्रकार हिन्दी शब्द की उत्पत्ति हिन्द देश के निवासियों के अर्थ में हुई। आगे चलकर यह शब्द 'हिन्द की भाषा' के अर्थ में प्रयुक्त होने लगा।


उपर्युक्त बातों से तीन बातें सामने आती हैं-


(1) 'हिन्दी' शब्द का विकास कई चरणों में हुआ-

सिंधु - हिन्दु - हिन्द + ई - हिन्दी।


(2) 'हिन्दी' शब्द मूलतः फारसी का है न कि हिन्दी भाषा का। यह ऐसे ही है जैसे बच्चा हमारे घर जन्मे और उसका नामकरण हमारा पड़ोसी करे। हालांकि कुछ कट्टर हिन्दी-प्रेमी 'हिन्दी' शब्द की व्युत्पत्ति हिन्दी भाषा में ही दिखाने की कोशिश की है, जैसे-हिन (हनन करनेवाला) + दु (दुष्ट) = हिन्दु अर्थात दुष्टों का हनन करनेवाला हिन्दु और उन लोगों की भाषा हिन्दी; हीन (हीनों) + दु (दलन) = हिन्दु अर्थात हीनों का दलन करनेवाला हिन्दु और उनकी भाषा हिन्दी। चूँकि इन व्युत्पत्तियों में प्रमाण कम, अनुमान अधिक है इसलिए सामान्यतः इन्हें स्वीकार नहीं किया जाता।


(3)'हिन्दी' शब्द के दो अर्थ हैं-'हिन्द देश के निवासी' (यथा-'हिन्दी है हम, वतन है हिन्दोस्तां हमारा'- इक़बाल) और 'हिन्द की भाषा'। हाँ, यह बात अलग है कि अब यह शब्द इन दो आरंभिक अर्थो से पृथक हो गया है। इस देश के निवासियों को अब कोई 'हिन्दी' नहीं कहता बल्कि भारतवासी, हिन्दुस्तानी आदि कहते हैं। दूसरे, इस देश की व्यापक भाषा के अर्थ में भी अब 'हिन्दी' शब्द का प्रयोग नहीं होता क्योंकि भारत में अनेक भाषाएँ हैं जो सब हिन्दी नहीं कहलाती। बेशक ये सभी हिन्दी की भाषाएँ हैं लेकिन केवल हिन्दी नहीं हैं। उन्हें हम पंजाबी, बांग्ला, असमिया, उड़िया, मराठी आदि नामों से पुकारते हैं इसलिए हिन्दी की इन सब भाषाओं के लिए 'हिन्दी' शब्द का प्रयोग नहीं किया जाता है।

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