हिंदी का विकास:


हिंदी में अरबी, फ़ारसी, तुर्की, पश्तो, अंग्रेजी, पुर्तगाली, प्रांसीसी, स्पेनिश, डच आदि अनेक भाषाओं से शब्द आये हैं।  इनकी सूची बहुत लम्बी है।  आगत शब्दों की संख्या के आधार पर इनका क्रम इस प्रकार निर्धारित किया जा सकता है- अंग्रेजी, फ़ारसी, आरबी, तुर्की, पुर्तगाली, फ़्रांसीसी, पश्तो, स्पेनिश, डच।  इनके अतिरिक्त इस भाषा ने सिंधी, पंजाबी, गुजरती,  मराठी,उड़िया, बांग्ला, द्रविड़, एवं मुंडा आदि जातीय भाषाओं से भी शब्द ग्रहण किये हैं।  कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं- कर्ण, धर्म, ज्ञान (संस्कृत), कान्ह, चन्द, चाँद, चांदी, पत्ता, पात, आग, आम, साँझ,  बूँद,नींद (पालि-प्राकृत-अपभ्रंश आदि); अनार, कमीज़, कलम, कारख़ाना, कारीगर, किताब, कुरता, ख़ुशामद, चादर, जलेबी, जिल्द, ताज़ा, दवात, नक़द, नफ़ा, नुकसान, प्याला, बर्फी, बादाम, बेईमान, बेकार, मज़दूर, शिकायत, सिफ़ारिश, सुराही (अरबी-फ़ारसी); उजबक, उर्दू, कलगी, काबू, कुली, कैची, गलीचा, चाक़ू, चिक, तमगा, तोप, दरोगा, लाश, सौग़ात (तुर्की); पठान, रोहिला (रोह=पहाड़) (पश्तो); कनस्तर (पुर्तगाली); सांई (सिंधी); लहँड़ा (पंजाबी); कोड़ी (संथाली); काफ़ी (तमिल); पिल्ला (तेलुगु); मोती=बड़ी (गुजराती); उपन्यास, गल्प (बांग्ला) आदि।

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हिंदी भाषा का विकास क्रम कुछ इस प्रकार है !