ध्वनि एवं रूप-रचना: 



हिंदी भाषा ने अन्य भाषाओं से केवल शब्द ही ग्रहण नहीं किए बल्कि ध्वनि एवं रूप-रचना का प्रभाव भी इस भाषा पर पड़ा है। इस भाषा ने फ़ारसी से क़, ख़, ग़, ज़, फ़ तथा अंगड़ाई से ऑ (डॉक्टर), फ (सेफ्टीरेज़र, ऑफिस) ध्वनियाँ, संस्कृत के लगभग सभी उपसर्ग और प्रत्यय, फारसी के आन, हा (बहुवचनसूचन); फ़ारसी-आरबी आन (बहुवचनसूचक) प्रत्यय (कहीं बहुवचन में, कहीं एकवचन में प्रयुक्त) जैसे- साहेबान, बारहा, कागज़ात, देहात; तर, तमार्थी फ़ारसी प्रत्यय= तर-तरीन बदतर, बेहतरीन, हिंदी में प्रयुक्त होते हैं।  भोजपुरी के प्रभाव के कारण परसर्ग 'ने' के प्रयोग का लोप किया है या कही-कही गलत प्रयोग। आजकल पंजाबी के प्रभाव के कारण हिंदी में 'ने' परसर्ग के गलत प्रयोग की प्रवृत्ति दिखाई पड़ती है जैसे-"मैंने घर जाना है।"' ब्रज के प्रभाव से पास के स्थान 'पर' या 'पै' के प्रयोग मिलते हैं जैसे-उस पर कपडा नहीं है, उनपै धोती नहीं है, आदि।

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