"हिन्दी" शब्द की व्युत्पति:
जैसे इस परिच्छेद के शुरू में कहा गया है 'हिन्दी' शब्द का विकास संस्कृत शब्द 'सिन्ध' से माना गया है : सं सिन्ध> फ़ा हिन्द/फ़ारस के लोग हिन्दुस्तान अर्थात भारत के लिए 'हिन्द' शब्द का प्रयोग क्यों और कैसे करने लगे थे, इस संबंध में एक अत्यंत रोचक तर्क दिया जाता है। आरम्भ में एक पाश्चात्य भाषा-शास्त्रों ने 'हिन्दी' शब्द की व्युत्पत्ति की खोज करते हुए यह सिद्ध कर दिया कि संस्कृत का 'स' फ़ारसी में 'ह' उच्चित होता है। अर्थात संस्कृत के शब्दों में आने वाला 'स' अक्षर फ़ारसी में 'स' की ध्वनि न दे कर 'ह' ही बोला जाता है। उन्होंने ने कहा कि आरम्भ में जब फ़ारस और भारत का संबंध स्थापित हुआ तो फ़ारसी लोग सिन्धु नदी तथा उस के दोनों तटों पर फैले सिन्धु प्रदेश तक आए और उपर्युक्त भाषा-शास्त्रीय नियम के अनुसार मजबूर हो कर 'सिन्धु' और 'सिन्ध' को 'हिन्दु' और 'हिन्द' कहने लगे। बाद में, धीरे-धीरे यह 'हिन्द' शब्द संपूर्ण भारत के लिये प्रयुक्त होने लगा। फ़ारसी लोग हिन्द के निवासियों को 'हिन्दू' कहने लगे। फ़ारसी में 'हिन्दू' शब्द का अर्थ है 'इस्लाम धर्म के न माननेवाले हिन्द वासी'।
इस व्युत्पत्ति के संबंध में जब यह शंका उठाई गई कि सिन्धु प्रदेश ही तो सारे भारत का द्योतक नहीं है, फिर सारे भारत और भारतवासी-मात्र के लिये 'हिन्द' और 'हिन्दू' शब्दों का प्रयोग क्यों होने लगा, तो इस मत के सम्रर्थकों ने यह तर्क दिया कि मुसलमानों ने पहला आक्रमण सिन्ध पर ही किया था। अतः अपने उच्चारण की मजबूरी के कारण वे लोग 'सिन्ध' को 'हिन्द' कहने लगे।डॉक्टर सुनीति कुमार चटर्जी को भी राजस्थानी की कुछ बोलियों में पूर्व बंगाल की बँगला, असमिया, नेपाली, मराठी, गुजराती भाषाओं में ऐसे उदाहरण मिले हैं जिन में 'स' का उच्चारण 'ह' हो जाता है। ग्रिर्यर्सन के अनुसार कश्मीरी भाषा में भी 'ह' वर्ण की प्रधानता मिलती है।
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